राज्य सरकार ने ग्रामीण इलाकों के लिए एक बेहद फायदेमंद योजना शुरू की है, जिसका नाम है गौधाम योजना। इस योजना के तहत गाय, बैल और अन्य पशुओं की देखभाल करने वालों को हर महीने तय वेतन दिया जाएगा। चरवाहों को ₹10,916 और गौसेवकों को ₹13,126 प्रति माह मिलेगा। इसका उद्देश्य न सिर्फ पशुओं की देखभाल करना है, बल्कि गांव के लोगों को रोजगार के अवसर देना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी है।
गौधाम बनाने के लिए सरकार जमीन, पानी, बिजली, बाउंड्री और शेड जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगी। एक गौधाम में अधिकतम 200 पशु रखे जाएंगे और इसका संचालन पंजीकृत गौशालाओं, ट्रस्ट, एनजीओ, किसान समूहों या सहकारी समितियों के हाथ में होगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का संचालन पारदर्शी तरीके से हो और हर पशु को सही देखभाल मिले।
इन गौधामों में सिर्फ पशुओं को खाना-पानी देने का ही काम नहीं होगा, बल्कि यहां लोगों को गोबर से खाद, तेल, अगरबत्ती, दंतमंजन, दीया जैसी उपयोगी चीजें बनाना भी सिखाया जाएगा। इन उत्पादों को बाजार में बेचकर लोग अतिरिक्त कमाई कर सकेंगे। इससे गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
पशुओं के चारे के लिए भी सरकार वित्तीय मदद देगी। पहले साल प्रति पशु ₹10 प्रतिदिन, दूसरे साल ₹20, तीसरे साल ₹30 और चौथे साल ₹35 की दर से सहायता मिलेगी। इतना ही नहीं, चारा उगाने के लिए भी अनुदान दिया जाएगा — एक एकड़ जमीन पर ₹47,000 और पांच एकड़ पर ₹2,85,000। इस तरह पशुपालकों पर खर्च का बोझ कम होगा और पशुओं को पोषक आहार मिलेगा।
इस योजना से गांव में बेरोजगारी कम होगी, आवारा और घायल पशुओं की देखभाल होगी और जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा। चरवाहों और गौसेवकों को स्थायी आमदनी मिलेगी, जिससे उनका जीवन स्तर सुधरेगा। कुल मिलाकर, गौधाम योजना न केवल पशुओं के लिए वरदान साबित होगी, बल्कि ग्रामीण विकास की दिशा में भी बड़ा कदम होगी।